By MySanskruti on Nov 13 2023

In 2021, the Gujarati New Year falls on Friday, 05th November. Gujarati New Year begins on Shukla Paksha Pratipada of Kartik month, the very next day after Diwali. Gujaratis as they celebrate their New Year is also known as Bestu Varas. The New Vikram Samvat year in Hindu Calendar starts on Shukla Paksha Pratipada during the month of Chaitra,which is when Guddi Padwa and Ugadi are celebrated. The day is also celebrated as Govardhan Puja all over the country.

Why we celebrate gujarati new year ?

As per the history goes, little Lord Krishna lifted the whole hill with his little finger, people trickled under the hill to take shelter from the storm. The Gujarati New Year or Bestu Varas is also called Varsha-pratipada. People clean their houses, prepare rangolis and wear new clothes and offer pujas at the temples.People wish each other on this special day.
It is believed that when Lord Krishna saw annual offerings and preparation for the prayers offered to Lord Indra, he convinced the people of Gokul that as farmers and shepherds, their true ‘Dharma’ was to do farming and to protect the cattle to the best of their abilities. They should not pray and conduct offerings for a deity and wait for a natural miracle. People of Gokul were convinced, and they stopped worshipping Lord Indra. They were worshipping Govardhan Hill and the cows on the advice of Lord Krishna. This made Indra, God of rain and thunder, angry and the people of Gokul had to face the wrath of Indra. Lord Indra flooded the village of Gokul for seven days and seven nights. Lord Krishna lifted the mount Govardhan just on his small finger and provided shelter and safety to the people, crops, and the cattle. Later, Lord Indra realised his mistake and soon apologised to Lord Krishna. Since then, it has become a tradition to worship Govardhan Hills and celebrate this day as New Year by Gujarati people. Customs and rituals of Govardhan Puja are performed to welcome ‘Gujarati New Year’ and bid farewell to the year passed by.

Hindi Translation

2021 में गुजराती नववर्ष शुक्रवार, 05 नवम्बर को पड़ता है। दिवाली के अगले ही दिन कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष प्रतिपदा पर गुजराती नववर्ष की शुरुआत होती है। गुजरातियों अपने नये साल का जश्‍न जिस रूप में मानते है उसे "बेसतू वरस" भी कहा जाता है। हिंदू कैलेंडर में नया विक्रम संवत वर्ष चैत्र माह के दौरान शुक्ल पक्ष प्रतिपदा पर शुरू होता है, जो तब आता है जब गुडी पड़वा ओर उगादी मनाया जाता है। इस दिन को पूरे देश में गोवर्धन पूजा के रूप में भी मनाया जाता है।

गुजराती नया साल क्यों मनाया जाता है ?​

इतिहास के अनुसार, छोटे भगवान कृष्ण ने अपनी छोटी उंगली से पर्वत को उठा लिया,लोग तूफान से आश्रय लेने के लिए पर्वत के नीचे खड़े रहे थे।ऐसा माना जाता है कि जब भगवान श्रीकृष्ण ने वार्षिक प्रसाद देखा ओर भगवान इन्द्र को दी जाने वाली प्रार्थनाओं की तैयारी की, उन्होंने गोकुल के लोगों को आश्वस्त किया कि किसान ओर चरवाहे के रूप में, उनका सच्चा 'धर्म' खेती करना ओर मवेशियों को उनकी क्षमताओं के अनुसार उनकी रक्षा करना था उन्हें किसी देवता के लिये प्रार्थना ओर प्रसाद का आचरण नही करना चाहिये और किसी प्राकृतिक चमत्कार का इंतजार नही करना चाहिये गोकुल के लोगों को यकीन हो गया ओर उन्होंने भगवान इंद्र की पूजा बंद कर दी। वे भगवान श्रीकृष्ण की सलाह पर गोवर्धन पर्वत ओर गायों की पूजा कर रहे थे। इससे वर्षा ओर गडगदाहट के देवता इंद्र क्रोधित हो गए ओर गोकुल के लोगों को इन्द्र के क्रोध का सामना करना पड़ा भगवान इंद्र ने गोकुल के गांव में सात दिन और सात रात तक बारिश से पानी भरा। भगवान श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को अपनी छोटी उंगली पर उठा लिया और लोगों को फसलों को ओर मवेशी को आश्रय ओर सुरक्षा प्रदान की, बाद में भगवान इंद्र को अपनी गलती का अहसास हुआ और उन्होंने जल्द ही भगवान श्रीकृष्ण से क्षमा याचना की। तब से गोवर्धन पर्वत की पूजा करना ओर इस दिन को गुजराती द्वारा नये साल के रूप में मनाना एक परंपरा बन गई है। लोगो मे 'गुजराती नववर्ष' के स्वागत और बीते वर्ष की विदाई के लिए गोवर्धन पूजा के रीति-रिवाज और अनुष्ठान किए जाते हैं। गुजराती नववर्ष या बेसतू वर्ष को वर्षा-प्रतिपदा भी कहा जाता है। लोग अपने घरों की सफाई करते है, रंगोली तैयार करते है ओर नये कपडे पहनें के मंदिरों में पूजा अर्चना करते है और लोग एक-दूसरे को नये साल के पहले दिन की बधाई देते है।

ब्रह्मध्वज नमस्तेऽस्तु सर्वाभीष्टफलप्रद ।
प्राप्तेऽस्मिन् वत्सरे नित्यं मद्गृहे मङ्गलं कुरु ॥

English Translation

We salute the Brahmadhvaja which provides all the desired fruits,
May this new year be auspicious for all.

Hindi Translation

जो सारे अभीष्ट फलों को प्रदान करता है,
उस ब्रह्मध्वज को नमन है, प्रार्थना है कि यह नव वर्ष मंगलमय हो।

By MySanskruti on Oct 25, 2022

सूर्य संवेदना पुष्पे, दीप्ति कारुण्यगंधने।
लब्ध्वा शुभं नववर्षेऽस्मिन कुर्यात्सर्वस्य मंगलम्॥

English Translation

As the sun gives light, the sensation gives birth to compassion, and the flowers always spread their fragrance. The same way, may our new year be a pleasant one for you every day, every moment.

Hindi Translation

जैसे सूर्य प्रकाश देता है, संवेदना करुणा को जन्म देती है, और फूल हमेशा अपनी सुगंध बिखेरते हैं।
इसी तरह हमारा नया साल आपके लिए हर दिन, हर पल मंगलमय हो।

By MySanskruti on Nov 5, 2021

आपृच्छस्व पुराणम् आमन्त्रयस्व च नवम् आशा-सुस्वप्न-जिगीषाभिः।
नववर्षशुभाशयाः

English Translation

Say goodbye to the old and embrace the new full of hope, dream, and ambition. Wishing you a happy new year

Hindi Translation

पुराने साल को अलविदा कहकर आशा, सपने और महत्वाकांक्षा से भरे नए वर्ष को गले लगाओ।आपको नए वर्ष की हार्दिक बधाई!

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